बिहार: कुपोषण से लड़ती आधी आबादी
बिहार: कुपोषण से लड़ती आधी आबादी
Fahmina Hussain, Patna
Media

बिहार : पिछले लगभग आठ वर्षों के शासनकाल में विकास दर में निरन्तर वृद्धि राज्य सरकार द्वारा बतायी जा रही है पर वास्तविकता यह है कि यहाँ गरीबी में कमी नहीं आयी है और आज भी बिहार की 55 प्रतिशत आबादी कुपोषण का शिकार है जबकि 70 प्रतिशत महिलायें एवं बच्चे खून की कमी से पीडित है। 

सरकारी आकड़ें की बात करें तो बिहार में प्रतिवर्ग किलोमीटर पर 1106 लोग रहते हैं। जहाँ बिहार के 12 जिलों में 51 प्रतिशत आबादी कुपोषण का शिकार है। 

भारत सरकार के महापंजीयक एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में बिहार के 56 प्रतिशत बच्चे कुपोषित थे। जबकि यह आंकड़ा वर्तमान में घट कर 52 प्रतिशत तक पहुंची है। राज्य का औसत जहां 52 प्रतिशत है वहीं पटना में यह आंकड़ा 59 है। पूरे बिहार के लगभग 66लाख गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों में से एक तिहाई सात जिलों पटना,मुज्जफरपुर, दरभंगा, गया, समस्तीपुर और पश्चिमी व पूर्वी चंपारण से आते हैं।

बिहार में गर्भवती महिलाओं की बात करें तो इनकी स्तिथि बहुत ही भयानक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में हर पांच में से तीन महिलाएं एनीमिया की शिकार है। वही 2015 में जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक, बिहार में 100,000 से ज्यादा गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे हैं, जिनका विकास दर सबसे कम है और परिणाम स्वरुप इन बच्चों में मौत का खतरा भी सबसे कहीं ज्यादा है। झारखंड और मध्य प्रदेश के साथ-साथ बिहार में भारत के कुपोषित बच्चों का अनुपात सबसे ज्यादा है।

सरकार ही यह मानती है कि यहां 1.45 करोड़ परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं l सरकार के ही द्वारा द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं आंगनबाडी, मध्याह्न भोजन योजना, जनवितरण प्रणाली, मातृत्व लाभ, स्वास्थ्य योजना पर 33 गांवों में कराए गए सर्वे के अनुसार उनकी स्थिति अत्यंत असंतोषजनक है। 

बिहार हाल के वर्षों में सड़क, बिजली आदि क्षेत्रों में सफलता हासिल की है, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य दो ऐसे क्षेत्र हैं जो नीतीश सरकार के सामने चुनौती बनकर खड़े हैं। हालांकि कुपोषण ख़त्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही योजनाएं चला रही हैं लेकिन बिहार में तमाम विकासशील योजना के बावजूद यह स्तिथि सवाल खड़े कर रहे हैं।