'MeToo' अभियान जिसे मीडिया की वजह मिली खूब सुर्खियां
'MeToo' अभियान जिसे मीडिया की वजह मिली खूब सुर्खियां
शकील सिद्दीकी
New Delhi

"MeToo" अभियान ने जिस तरह तेजी पकड़ी उससे समाज ने अपराध के खिलाफ आवाज़ उठाने का नया हौंसला महिलाओं को दिया। इस अभियान के तहत कई महिला पत्रकारों ने अपने मेल साथियों पर यौन- शोषण के खिलाफ सामने आई। इसकी आग ऐसी भड़की की केंद्रीय मंत्री तक को अपने लपेटे में ले लिया।

दरअसल कार्यस्थल पर यौन-उत्पीडऩ का अनुभव करनेवाली महिलाओं की एक बड़ी आबादी सामाजिक लांछन और अन्य आशंकाओं से चुप रहती आयी है लेकिन इस अभियान के साथ मुखरता के दौर का आगाज़ किया गया। यहाँ तक की इससे लैंगिक समानता की दिशा में संभावनाओं के नये दरवाज़े भी खुलें।

हालांकि तनुश्री दत्ता के बाद से जिस तरह मी-टू के कई मामले सामने आये हैं उससे समाज भी दो भागों में बनता दिखा है। कुछ महिलाओं के साथ खड़े हैं तो कुछ इसे सस्ता प्रचार और ब्लैकमेलिंग का तरीका तक बता दिया।

टीवी धारावाहिक की एक अभिनेत्री ने मी टू पर बयान देते हुए फिल्म जगत के बारे में कहा है कि वहां बलात्कार नहीं होते बल्कि सब कुछ सहमति से जुड़ा होता है। कास्टिंग काउच नामक बुराई को लेकर तो गाहे-बगाहे बवाल मचता रहा, इस समूचे प्रसंग में बातें उभरकर सामने आई बल्कि सोशल मीडिया की वजह से भले ही इस मुद्दे को खूब सुर्खियां मिल रही हों और इसे महिलाओं में बढ़ रहे साहस का प्रतीक माना जा रहा।

"मी-टू " के तमाम मामलों व विवाद के बीच केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने चार सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक समिति गठित किये जाने की घोषणा कर दी जो यौन उत्पीडऩ की सभी शिकायतों की स्वतंत्र जांच कर अपनी रिपोर्ट दर्ज़ करने की घोषणा की।

आज महिलाओं ने 'मी टू' जैसा अभियान चलाकर न सिर्फ महिलाओं की हिम्मत बढ़ायी है बल्कि पुरुषों को भी सचेत कर दिया है। तनुश्री की वजह से एक के बाद एक बड़े-बड़े लोगों के चेहरे सामने आने लगे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिलाएं कितना कुछ झेलती आ रही थीं। अब सवाल है कि क्यों उन्होंने अब तक अपनी आवाज दबा रखी थी? क्या कानून फर्क करता है?